डॉक्टर्स डे विशेष: कम फीस अच्छी सेवा के लिए, गरीब मरीज हो तो माफ भी कर देते हैं…

डॉक्टर और मरीज का रिश्ता भरोसे पर कायम रहता है। मौजूदा हालात में मरीजों के मन में कई तरह के सवाल आते हैं। दो दिन पहले करवाई जांच डॉक्टर साहब दोबारा क्यों कर रहे? इलाज की शुरुआत में ही बड़ी संख्या में जांचें क्यों लिख दी जाती हैं? कहीं पर 15 दिन में एक बार फीस ले रहे तो कहीं महज सप्ताहभर में फीस क्यों लेते हैं? ऐसे ही कई सवालों के जवाब जानने के लिए आज की सुर्खियां ने शहर के वरिष्ठ डॉक्टर विकास अग्रवाल से चर्चा की।
*सारे सवालों के जवाब*
Q. पहले डॉक्टर नब्ज देखकर बीमारी बता देते थे, अब तो हर बात पर जांच करवाते हैं, ऐसा क्यों?
A. पहले बहुत सारी जांचें उपलब्ध नहीं थीं। अब उन्नत तकनीक और जांचें आ गई हैं। अब कई तरह के कानूनी मामलों का भी सामना करना पड़ता है। मरीज खुद आरोप लगा देते हैं कि आपको जांच करवा लेना थी। इसलिए कोई रिस्क नहीं लेता।
Q. फीस इतनी ज्यादा क्यों बढ़ाई जा रही है, डॉक्टरी पेशे में इसके लिए कोई नियम-कायदे तय क्यों नहीं होते?
A. डॉक्टर्स अपने अनुभव और योग्यता के अनुसार फीस का निर्धारण करते हैं। हर बड़ा वकील लाखों रुपए फीस चार्ज करता है। होटल्स में किराया हजारों और लाखों रुपए में होता है। सीए से भी पूछा जाना चाहिए। ज्यादा फीस सेवा की गुणवत्ता देने के लिए भी लेते हैं। फीस कितने दिन में लेना है, यह निजी अधिकार है। लेकिन कोई अगर गरीबी या कोई ऐसा व्यक्ति आता है जो पीस ना दे सके तो उसे माफ कर दिया जाता है एवं इलाज न होने पर पूर्ण रूप से उसकी फीस वापसी दे दी जाती है बस दवाइयां का काटा जाता है पर इसका जो फीस दे सकता है क्यों के द्वारा गलत फायदा उठाया जाता है उनसे निवेदन है कि ऐसा ना करें क्योंकि उनके दिए गए फीस से जो ना दे सकता है उनका इलाज किया जाता है
Q. सेकंड ओपिनियन के लिए जाने पर डॉक्टर फिर से उतनी ही जांच क्यों लिख देते हैं?
A. कुछ डॉक्टर ऐसा करते हैं तो गलत है। अगर पहले की जांच मौजूदा बीमारी से संबंधित है और सही जगह से की गई है तो जांच को माना जाना चाहिए। हां, कुछ जांचें ऐसी हो सकती हैं, जिनके पैरामीटर एक-दो दिन में बदलते हों, लेकिन ज्यादातर मामलों में ऐसा नहीं होता। लैब विशेष से जांच करवाने का दबाव भी डॉक्टर कभी नहीं बनाते।
Q. मरीज गरीब है या किसी इलाज में बहुत पैसे लग चुके हों, तो क्या डॉक्टर या अस्पताल फीस माफ कर देते हैं?
A. कई बार अस्पताल 30 से 40 प्रतिशत बिल माफ करते हैं। डॉक्टर अपने-अपने हिसाब से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की सहायता करने की कोशिश करते रहे हैं। ट्रस्ट से जुड़े कई अस्पतालों में मरीजों का कम दर या मुफ्त में इलाज करना होता है।
Q. पहली बार में ही मर्ज देखकर इतनी सारी दवाइयां क्यों लिख दी जाती है? क्या दवा कंपनी का दबाव रहता है?
A. अनावश्यक दवाइयों को लिखने का तो कोई समर्थन नहीं करेगा। वरिष्ठ डॉक्टर्स कभी ऐसा नहीं करते, क्योंकि अनुभव से वे एक बार में समझ जाते हैं। दवा कंपनियों को किसी तरह का दबाव नहीं रहता। बीमारी के मुताबिक ही दवाई लिखी जाती है।
Q. हेल्थ केयर सिस्टम में कैसे सुधार होगा?
A. बेस्ट हेल्थ केयर करना है तो उसके लिए सरकार को आगे बढ़ना होगा। सरकारी व्यवस्थाओं को निजी संस्थाओं की तरह उन्नत करना चाहिए। कोई भी व्यक्ति 50 साल या अधिक उम्र का है तो नियमित चेकअप करवाना चाहिए।
Q. पुराने पर्चे से दवाइयां लेना कितना सही है?
A. यह रिस्की है, क्योंकि दवाइयां एक समय के बाद असर करना कम कर देती हैं। डॉक्टर बदलते वक्त पुराना परचा साथ रखना जरूरी है।

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