अप संपादक वैभव शर्मा की दिल दहला देने वाली खबर
खाद दुकानदारों को वीडियो वायरल करने की धमकी देने का दावा, एक कारोबारी से ₹50🤑 हजार लिए जाने का आरोप
सवाल—क्या पत्रकारिता के नाम पर किसी को डराने और पैसे मांगने का अधिकार है?
पत्थलगांव। क्षेत्र में खाद कारोबार से जुड़े कुछ व्यवसायियों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने पत्रकारिता की गरिमा और उसकी आड़ में कथित रूप से की जा रही वसूली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यवसायियों का आरोप है कि कुछ लोग स्वयं को पत्रकार बताकर खाद दुकानदारों पर दबाव बना रहे हैं और कथित वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे की मांग कर रहे हैं।
व्यवसायियों द्वारा लगाए गए आरोपों में ऋषिकेश मिश्रा और अमित पांडे के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि खाद दुकानदारों के खिलाफ अधिक दर पर खाद बेचने से संबंधित कथित वीडियो तैयार किए जा रहे हैं और इन वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर व्यवसायियों पर दबाव बनाया जा रहा है।
वीडियो के नाम पर दबाव, फिर पैसों की मांग का आरोप
एक खाद व्यवसायी ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि कथित धमकी और दबाव के बाद उससे फोन-पे के माध्यम से 50 हजार रुपये लिए गए। व्यवसायी का आरोप है कि वीडियो वायरल करने की बात कहकर उसे भय और दबाव की स्थिति में लाया गया तथा इसके बाद पैसों की मांग की गई।
यदि किसी खाद विक्रेता द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर खाद बेचने की शिकायत है, तो उसकी जांच और कार्रवाई का अधिकार संबंधित विभाग एवं सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों को है। किसी कथित पत्रकार को कानून अपने हाथ में लेकर किसी व्यापारी को धमकाने, दबाव बनाने या निजी तौर पर पैसे मांगने का अधिकार नहीं है।
पत्रकारिता सवाल पूछती है, सौदा नहीं करती
पत्रकारिता का काम भ्रष्टाचार, अनियमितता और जनहित से जुड़े मामलों को सामने लाना है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता की पहचान का इस्तेमाल कर किसी व्यापारी को डराता है, वीडियो वायरल करने की धमकी देता है या कथित रूप से पैसे की मांग करता है, तो यह पूरे पत्रकार समाज की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
वास्तविक पत्रकार और पत्रकारिता से जुड़े संस्थानों की पहचान उनके समाचार माध्यम, संपादकीय व्यवस्था, प्रकाशित खबरों और वैध व्यावसायिक/पत्रकारीय गतिविधियों से होती है। केवल कैमरा, मोबाइल, प्रेस लिखे कार्ड या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी व्यक्ति को पत्रकार मान लेना उचित नहीं है।
प्रशासन से उठ रही निष्पक्ष जांच की मांग
खाद कारोबारियों का कहना है कि यदि किसी दुकान में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद बेचने की शिकायत है तो संबंधित विभाग उसकी जांच करे और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करे। लेकिन वीडियो बनाकर वायरल करने की कथित धमकी और उसके आधार पर पैसों की मांग की शिकायत भी उतनी ही गंभीरता से जांची जानी चाहिए।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित व्यक्तियों के पास किसी मान्यता प्राप्त समाचार माध्यम से जुड़ाव का प्रमाण है? क्या उन्होंने किसी खबर के लिए आधिकारिक रूप से संबंधित पक्ष का पक्ष लिया? और यदि वीडियो वास्तव में किसी अनियमितता का प्रमाण था, तो उसे संबंधित विभाग या प्रशासन को सौंपने के बजाय कथित रूप से पैसे मांगने की नौबत क्यों आई?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
महत्वपूर्ण: इस रिपोर्ट में उल्लिखित आरोप व्यवसायियों के कथन पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऋषिकेश मिश्रा और अमित पांडे का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

आज की सुर्खियां की स्पष्ट बात (उप संपादक वैभव शर्मा)
पत्रकारिता किसी व्यक्ति को डराने की ढाल नहीं, जनता की आवाज उठाने की जिम्मेदारी है। यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता के नाम पर कथित रूप से धमकी या वसूली करता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए—और यदि आरोप गलत हैं, तो संबंधित व्यक्तियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार भी मिलना चाहिए।
विशेष रिपोर्ट | उप संपादक वैभव शर्मा
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