विशेष जमीनी रिपोर्ट: वैभव शर्मा (उप संपादक, आज की सुर्खिया)
स्थानः पत्थलगांव (जशपुर)

पत्थलगांव। जशपुर जिले के पत्थलगांव ब्लॉक से सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की एक ऐसी सुखद तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक अमले के सामने सुशासन का एक नया पैमाना तय कर दिया है। यहाँ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में समाज कल्याण बोर्ड और मेडिकल बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य और ऐतिहासिक दिव्यांग शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर बैठे विशेष रूप से सक्षम (दिव्यांग) भाई-बहनों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने का महायज्ञ साबित हुआ।
रॉकेट स्पीड’ से ऑन-स्पॉट डिजिटल सेवा
इस ऐतिहासिक शिविर की सबसे बड़ी खासियत यहाँ की ‘रॉकेट स्पीड’ कार्यप्रणाली रही। दफ्तरों के चक्कर काटने और महीनों इंतजार करने के पुराने ढर्रे को पूरी तरह खत्म करते हुए प्रशासन ने तकनीक का बेहतरीन उपयोग किया। उप संपादक वैभव शर्मा की प्रत्यक्ष मौजूदगी में, मात्र एक आधार कार्ड और मोबाइल ओटीपी (OTP) के जरिए ऑन-स्पॉट डिजिटल दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर सीधे हितग्राहियों के हाथों में सौंप दिए गए।
बीएमओ डॉ. जेम्स मिंज की टीम ने पेश की मिसाल

खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. जेम्स मिंज और उनकी पूरी मेडिकल टीम ने संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की। शिविर में आए दिव्यांगजनों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए डॉक्टरों और कर्मचारियों ने खुद आगे बढ़कर मोर्चा संभाला। विभागों के इस आपसी तालमेल और त्वरित निर्णय क्षमता की वजह से कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक को बिना किसी मानसिक या शारीरिक परेशानी के तुरंत उसका अधिकार पत्र मिल गया।
प्रशासनिक अमले के लिए बनेगा ‘रोल मॉडल’
आमतौर पर सरकारी दफ्तरों की लेटलतीफी से परेशान रहने वाले ग्रामीणों के लिए यह शिविर किसी वरदान से कम नहीं था। मौके पर ही प्रमाण पत्र पाकर दिव्यांगों और उनके परिजनों के चेहरों पर जो मुस्कान दिखी, उसने इस आयोजन की सफलता को प्रमाणित कर दिया। तकनीक और संवेदनशीलता का यह अनूठा संगम छत्तीसगढ़ के पूरे प्रशासनिक ढांचे के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल साबित होगा।
