क्रांतिकारी पत्रकार वैभव शर्मा की विशेष खबर
कभी शासकीय आरा मिल, राइस मिल और बीड़ी कारखानों के नाम रही जमीन अब निजी नाम पर कैसे दर्ज हुई? सरकारी भवनों की जमीन पर भी सवाल

धरमजयगढ़। सरकारी जमीन… सरकारी संस्थान… और रिकॉर्ड में निजी नाम! आखिर यह बदलाव हुआ कैसे? धरमजयगढ़ में जमीन के दस्तावेजों को लेकर उठ रहे सवाल अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को हवा दे रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि शासकीय आरा मिल, राइस मिल और बीड़ी कारखानों के लिए इस्तेमाल हुई जमीन आज निजी नामों पर दर्ज बताई जा रही है। इतना ही नहीं, शासकीय भवनों से जुड़ी जमीन के रिकॉर्ड को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सरकारी जमीन निजी नाम पर कैसे पहुंची?
सबसे बड़ा सवाल यही है—जिस जमीन का उपयोग सरकारी मिलों और कारखानों के लिए हुआ, वह निजी स्वामित्व में दर्ज कैसे हुई? क्या जमीन का विधिवत हस्तांतरण हुआ था? अगर हुआ तो किस आदेश के तहत? और अगर नहीं हुआ, तो रिकॉर्ड में नाम बदलने की प्रक्रिया किसने और कैसे पूरी की?
इन सवालों के जवाब राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण आदेश और पुराने दस्तावेजों की जांच से ही सामने आ सकते हैं।
अब दस्तावेज बोलेंगे या जिम्मेदार?
मामला बेहद संवेदनशील है। इसलिए आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा जरूरी है कि संबंधित विभाग पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे।
सरकारी जमीन अगर निजी हो गई, तो कहानी सिर्फ जमीन की नहीं—पूरे सिस्टम की पड़ताल की है।
क्रांतिकारी पत्रकार वैभव शर्मा
उप संपादक | आज की सुर्खियां
आज की सुर्खियां इस मामले से जुड़े दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर आगे भी पड़ताल जारी रखेगा।
