मछली बोली—“हमें पकड़ने आई थीं, खुद आत्मनिर्भर बन गईं!” मनोरा-दुलदुला की महिलाओं का कमाल
क्रांतिकारी पत्रकार वभव शर्मा की विशेष खबर

जशपुर। तालाब में मछली तो बहुत लोग पकड़ते हैं, लेकिन मनोरा और दुलदुला की महिलाओं ने ऐसा जाल डाला कि मछली के साथ-साथ लाखों की कमाई भी हाथ लग गई! अब तालाब सिर्फ मछलियों का घर नहीं, महिलाओं की तरक्की का ठिकाना बन चुका है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल और शासन की योजनाओं से महिला स्व-सहायता समूहों ने शासकीय तालाबों को आजीविका का साधन बनाया। नतीजा यह कि मछलियां पानी में तैर रही हैं और कमाई महिलाओं की जेब में!
भभरी में तालाब ने खोल दिया कमाई का रास्ता
मनोरा के ग्राम भभरी में कमल महिला स्व-सहायता समूह पिछले तीन वर्षों से 0.700 हेक्टेयर के शासकीय तालाब में मछली पालन कर रहा है। हर साल करीब 3 क्विंटल मछली का उत्पादन और लगभग 6 लाख रुपये का विक्रय हो रहा है।
मतलब तालाब वही, पानी वही… लेकिन महिलाओं की मेहनत ने पूरी कहानी बदल दी!
सिमड़ा में भी मछलियों की ‘शामत’
दुलदुला के ग्राम सिमड़ा में दीप महिला स्व-सहायता समूह ने 0.800 हेक्टेयर के शासकीय तालाब को कमाई का जरिया बना लिया। यहां करीब 3.30 क्विंटल वार्षिक उत्पादन से लगभग 6.93 लाख रुपये का विक्रय प्राप्त हो रहा है।
अब हालात ऐसे हैं कि मछली तालाब में जाने से पहले शायद सोचती होगी—“कहीं दीप समूह के तालाब में तो नहीं पहुंच गई!” 😄
तालाब में मछली, घर में खुशहाली
मछली पालन से महिलाओं को नियमित आय मिली है। बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों में उनका योगदान बढ़ा है। सबसे बड़ी बात—महिलाएं अब अपनी आजीविका खुद संभाल रही हैं और आर्थिक फैसलों में भी मजबूत भूमिका निभा रही हैं।
कहानी का सार साफ है—तालाब छोटा हो सकता है, लेकिन अगर मेहनत बड़ी हो तो कमाई भी बड़ी हो सकती है।
आज की सुर्खियां | क्रांतिकारी अंदाज में खास रिपोर्ट
समाचार खोजना आसान है… लेकिन उसमें ऐसा तड़का लगाना कि पाठक पढ़ते-पढ़ते मुस्कुरा दे और खबर भी याद रखे—यही हमारी पत्रकारिता है!
क्रांतिकारी पत्रकार वैभव शर्मा
उप संपादक | आज की सुर्खियां
