
गोद में बच्चा, हाथ में पैसे की मांग… सवाल यह कि आखिर इन नौनिहालों के भविष्य का जिम्मेदार कौन?
क्रांतिकारी पत्रकार वैभव शर्मा की विशेष खबर | आज की सुर्खियां
पत्थलगांव में घर-घर, बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर छोटे-छोटे बच्चों से पैसे मांगवाने का मामला लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है। बस स्टैंड से लेकर पुष्प वाटिका और सोमवार बाजार तक नाबालिग बच्चों के हाथों में किताबों की जगह पैसे मांगने की मजबूरी दिखाई दे रही है। सवाल सिर्फ कुछ रुपयों का नहीं, बल्कि इन बच्चों के पूरे भविष्य का है।
स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, कुछ परिवारों के छोटे बच्चों को कथित तौर पर अलग-अलग जगह भेजकर पैसे मांगने के लिए कहा जाता है। कई बच्चे लोगों से एक-दो रुपये नहीं, बल्कि सीधे “10 रुपये या जितना देना हो दे दीजिए” जैसी मांग करते नजर आते हैं। कुछ मामलों में कम उम्र की बच्चियां स्वयं छोटे बच्चों को गोद में लेकर पैसे मांगती दिखाई देती हैं। यदि ये बच्चे स्कूल जाने की उम्र में सड़कों और बाजारों में पैसे मांगने को मजबूर हैं, तो यह व्यवस्था और समाज—दोनों के लिए गंभीर सवाल है।
15 साल की उम्र में मातृत्व—क्या कोई इसे सामान्य मान सकता है?
सबसे गंभीर चिंता उन नाबालिग बच्चियों को लेकर है, जिनके बारे में कम उम्र में गर्भवती होने और फिर बच्चे को गोद में लेकर भीख मांगने जैसी बातें सामने आ रही हैं। यदि किसी नाबालिग के साथ ऐसा हो रहा है, तो यह केवल गरीबी का मामला नहीं रह जाता—यह बाल संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून से जुड़ा बेहद गंभीर विषय बन जाता है।
देश में बच्चों को भविष्य की नींव माना जाता है। ऐसे में अगर कोई बच्चा स्कूल की ओर जाने के बजाय हाथ फैलाकर पैसे मांगने को मजबूर है, तो हमें यह पूछना ही होगा—क्या हम उस बच्चे का भविष्य बचाने में असफल हो रहे हैं?
पहले भी सामने आया था बच्चे पर कथित हमला
‘आज की सुर्खियां’ द्वारा पूर्व में भी एक गंभीर मामला सामने लाया गया था, जिसमें भीख मांगकर अपेक्षित रकम नहीं ला पाने पर एक बच्चे के साथ उसके पिता द्वारा कथित मारपीट और गंभीर हमला किए जाने की जानकारी सामने आई थी। उस खबर को विभिन्न समाचार माध्यमों ने भी प्रमुखता से प्रसारित किया था।
इसके बावजूद यदि उसी क्षेत्र में बच्चों से भीख मंगवाने की स्थिति आज भी दिखाई दे रही है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है—आखिर जिम्मेदार विभाग कब जागेंगे?
पैसे देने वालों से भी एक सवाल
बच्चे जब हाथ फैलाते हैं तो इंसानियत उन्हें पैसे देने को कहती है। लेकिन क्या हर बार पैसे देना ही समाधान है?
अगर बच्चे लगातार भीख मांगते रहेंगे और उन्हें पैसे मिलते रहेंगे, तो संभव है कि उनका भीख मांगने का सिलसिला और मजबूत हो। ऐसे मामलों में प्रशासन को बच्चों की पहचान कर उनकी शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए तथा यह भी जांचना चाहिए कि उनसे भीख क्यों मंगवाई जा रही है।
अब सवाल पत्थलगांव से है—इन बच्चों की पढ़ाई कब शुरू होगी?
बस स्टैंड, पुष्प वाटिका, सोमवार बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई देने वाले इन नाबालिग बच्चों को केवल “भिखारी” कहकर छोड़ देना समस्या का समाधान नहीं है।
इनके हाथ में कटोरा नहीं, किताब होनी चाहिए।
इनकी आंखों में पैसों की मांग नहीं, सपने होने चाहिए।
और इनके भविष्य पर किसी की मजबूरी या लापरवाही का बोझ नहीं होना चाहिए।
प्रशासन से मांग है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बाल संरक्षण अधिकारियों एवं संबंधित विभागों की टीम भेजकर पूरे मामले की जांच कराई जाए। यदि बच्चों से जबरन भीख मंगवाई जा रही है या उनके साथ किसी प्रकार का शोषण हो रहा है, तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
क्रांतिकारी पत्रकार वैभव शर्मा की कलम से उठे सवाल का जवाब अब जिम्मेदार विभागों को देना होगा—
आखिर पत्थलगांव के इन नौनिहालों का भविष्य कौन बचाएगा?
आज की सुर्खियां — खबर वही, जो सवाल खड़े करे।
