
वर्षों से अकेले दम पर श्रीमती नारायणी शर्मा का भव्य आयोजन, बाल रूप में पालकी पर विराजकर भक्तों को दर्शन देते हैं ‘लल्ला’
क्रांतिकारी पत्रकार वैभव शर्मा की विशेष खबर
जन्माष्टमी पर मटकी फोड़, झांकियां और धार्मिक आयोजन तो आपने खूब देखे होंगे, लेकिन कृष्ण भगवान की छठी का ऐसा अनोखा और भव्य आयोजन शायद ही कहीं देखने को मिले। सफल गांव में श्रीमती नारायणी शर्मा जी द्वारा पिछले कई वर्षों से यह आयोजन लगातार श्रद्धा, भक्ति और मनोरंजन के साथ किया जा रहा है।
इस आयोजन का सबसे आकर्षक पल तब आता है, जब कृष्ण भगवान बाल रूप में ‘लल्ला’ बनकर पालकी में विराजते हैं और भक्तों के बीच दर्शन देने पहुंचते हैं। लल्ला के आगमन पर सखियों द्वारा पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया जाता है। देखते ही देखते पूरा माहौल कृष्ण भक्ति में रंग जाता है।
माताओं-बहनों के लिए खास आस्था और बधाई की परंपरा
इस आयोजन से जुड़ी एक विशेष परंपरा लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहती है। मान्यता और आस्था के अनुसार, जिन माताओं-बहनों की गोद सूनी है, उन्हें श्रीमती नारायणी शर्मा जी द्वारा विशेष रूप से मंत्र कर आशीर्वाद एवं बधाई दी जाती है। श्रद्धालु इसे कृष्ण भगवान के आशीर्वाद और लल्ला की कृपा से जुड़ी आस्था के रूप में देखते हैं।
आयोजन में भजन-कीर्तन, जयकारों और सखियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता से माहौल पूरी तरह कृष्णमय हो जाता है। चारों ओर गूंजता है—“नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की।”
वर्षों से बिना किसी सहयोग के जारी है अनोखी पहल
बताया जाता है कि श्रीमती नारायणी शर्मा जी द्वारा यह आयोजन कई वर्षों से अपने स्तर पर बिना किसी सहयोग के किया जा रहा है। सफल गांव में कृष्ण भगवान की छठी का यह आयोजन अपनी तरह की अलग पहचान बना चुका है।
यहां भक्ति है, परंपरा है, मनोरंजन है और सबसे खास—लल्ला के बाल रूप में दर्शन का अद्भुत आनंद है।
कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है और उपस्थित माताओं-बहनों एवं सखियों को विशेष बधाई देकर आयोजन का हर्षोल्लास के साथ समापन किया जाता है।
कृष्ण की छठी… लल्ला की पालकी… सखियों की पुष्पवर्षा और भक्ति में डूबा पूरा गांव—यही इस अनोखे आयोजन की सबसे बड़ी पहचान है।
आज की सुर्खियां
क्रांतिकारी पत्रकार वैभव शर्मा की विशेष प्रस्तुति
