
पत्थलगांव से ‘आज की सुर्खियां’ के लिए उप संपादक वैभव शर्मा की तीखी रिपोर्ट
पत्थलगांव: “कांग्रेसियों का चेहरा भले ही बदल गया हो, लेकिन उनकी अलोकतांत्रिक नियत आज भी वैसी ही है।” यह तीखा हमला पत्थलगांव विधायक और सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय ने किया है। देश में लगाए गए आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में विधायक साय ने कांग्रेस के इतिहास को लेकर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि लोकतंत्र पर आघात करने वाले उस खौफनाक और काले दौर को यह देश कभी भूल नहीं सकता।

सत्ता की हवस में कुचला गया था नागरिक अधिकार’
आज की सुर्खियां’ से विशेष बातचीत में गोमती साय ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे शर्मनाक और काला अध्याय करार दिया। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जो कौम अपने अतीत को भुला देती है, वह कभी उज्जवल भविष्य का निर्माण नहीं करसकती। विधायक ने जशपुर जिले और छत्तीसगढ़ का जिक्र करते हुए दर्द बयां किया कि किस तरह उस दौर में आज़ाद भारत के निर्दोष नागरिकों को बिना किसी अपराध के जेल की काल कोठरियों में ठूंस दिया गया था और पूरा इलाका भय और दहशत के साए में जीने को मजबूर था।

इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए घोंटा था प्रेस का गला
विधायक ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सिर्फ अपनी सत्ता और कुर्सी बचाने के लिए पूरे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की बलि चढ़ा दी थी। प्रेस की आज़ादी पर उस दौर में हुआ प्रहार आज भी लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी है। कई मीडिया घरानों पर ताले जड़ दिए गए, सच लिखने वाले पत्रकारों को सलाखों के पीछे भेजा गया और कइयों को देश छोड़ने पर मजबूर किया गया। गोमती साय ने सवाल उठाया कि सिर्फ एक ‘विशेष परिवार’ के हाथों में सत्ता को महफूज़ रखने के लिए पूरे देश को बंधक बना दिया गया था।
सेक्युलरिज्म की आड़ में देश को गुमराह करने की कोशिश
प्रेस वार्ता के अंत में गोमती साय ने एक और बड़ा वैचारिक दांव खेलते हुए कहा कि धर्म के आधार पर देश का विभाजन होने के बाद भी, भारत को ‘सेक्युलरिज्म’ के नाम पर किस दिशा में धकेलने की कोशिश की गई, इस पर आज खुली और गंभीर चर्चा होना बेहद जरूरी है।

