खास रिपोर्ट: वैभव शर्मा, उप संपादक (आज की सुर्खियां)
जशपुर (छत्तीसगढ़): ग्रामीण अंचलों में शासन-प्रशासन और जनता के बीच मजबूत सेतु की भूमिका निभाने वाले कोटवारों ने अपने हितों की रक्षा के लिए हुंकार भरी है। जिला जशपुर के पत्थलगांव तहसील से कोटवार संघ ने अपनी जायज चिंताओं को लेकर एक महत्वपूर्ण मांग पत्र साझा किया है। इस आवेदन के जरिए कोटवारों ने अपनी रोजमर्रा की सेवा के बीच आने वाली व्यवहारिक दिक्कतों को दूर करने की गुहार लगाई है।

बिना जांच एकतरफा कार्रवाई पर रोक की मांग
कोटवार संघ के सचिव और अध्यक्ष की अगुवाई में सौंपे गए इस आवेदन में मुख्य रूप से यह बात उठाई गई है कि आए दिनों कोटवारों के खिलाफ कुछ झूठी शिकायतें दर्ज करा दी जाती हैं। संघ का कहना है कि राजस्व अधिकारियों द्वारा बिना कोटवारों का पक्ष सुने या बिना जमीनी हकीकत और सही तथ्यों की जानकारी लिए सीधे पदमुक्त या निलंबित करने जैसी कार्रवाई की जा रही है।
कोटवारों की मांग है किः
किसी भी शिकायत पर तब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो, जब तक उसकी विधिवत और निष्पक्ष जांच न पूरी कर ली जाए।
कोटवारों को अपनी बात और पक्ष रखने का पूरा और न्यायसंगत अवसर दिया जाए।
नियुक्ति से प्रतिबंध हटाने का अनुरोध
दस्तावेज़ के अनुसार, कोटवारों ने एक और महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदु की ओर ध्यान आकर्षित कराया है। उनकी मांग है कि नगर पालिका निगम क्षेत्र के अंतर्गत कोटवारों की नई नियुक्तियों पर जो प्रतिबंध लगा हुआ है, उसे तत्काल प्रभाव से हटाया जाए ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।
एकजुटता की मिसाल: दर्जनों कोटवारों ने किया समर्थन
इस मांग पत्र की सबसे खूबसूरत और खास बात इसकी सामूहिक ताकत है। आवेदन के निचले हिस्से में हनुमान कुजूर, मानुराम, साजन दास, ओमप्रकाश, ठाकुर सिंह, आर. चौहान, हातम बाई, प्यारा बाई और चैला चौहान समेत दर्जनों स्थानीय कोटवारों के हस्ताक्षर और नाम दर्ज हैं, जो यह दर्शाते हैं कि यह मांग किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक आवाज है।



कोटवारों ने पूरी शालीनता और नियमों के दायरे में रहकर महोदय से अनुरोध किया है कि उनके हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द एक सकारात्मक शासनादेश जारी किया जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस जमीनी अमले की इस संवेदनशील और न्यायसंगत मांग पर कितनी जल्दी सहानुभूतिपूर्वक विचार करता है।



