यह मामला जशपुर जिले के बागबहार क्षेत्र के कुकुरभुका (कोयलापहरी) गांव का है, जहां ग्रामीण और जनप्रतिनिधि अवैध खनन और बेशकीमती वन संपदा के दोहन के खिलाफ लामबंद हो गए हैं।

इस मामले के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
विरोध का कारण: पिछले 9 दिनों से ग्रामीण इस बात से आक्रोशित हैं कि गौठान और बेशकीमती जंगल की जमीन पर लीज के नाम पर कब्जा किया जा रहा है । ग्रामीणों का आरोप है कि खनिज माफिया द्वारा करोड़ों रुपये के खनिज का अवैध दोहन किया जा रहा है ।
नुकसान: सरपंच श्रीमती शकुंतला साय और ग्रामीणों के अनुसार, माफियाओं ने शासन द्वारा निर्मित गौठान को क्षतिग्रस्त कर दिया है, गायों के पानी पीने के तालाब को पाट दिया है और यहां तक कि वहां स्थित मंदिर को भी नुकसान पहुंचाया गया है ।
अवैध निर्माण: पंचायत की बिना अनुमति के जंगल में अवैध सड़कों का निर्माण किया गया है और क्रेशर मिल स्थापित करने के लिए गरीबों व आदिवासियों की जमीन पर जबरन कब्जा करने के आरोप हैं ।
प्रशासनिक कार्रवाई: सरपंच, पंच और बीडीसी सदस्यों के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बागबहार तहसीलदार और टीआई (TI) को ज्ञापन सौंपा है [2]। तहसीलदार ने स्वीकार किया है कि ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और जिला अधिकारियों के निर्देशानुसार इस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी ।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि उनकी जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए शासन जल्द सुध नहीं लेता, तो वे इस “तुगलकी शासन” के खिलाफ आंदोलन और तेज करेंगे।




