महर्षि सान्दिपनी विद्या मंदिर विद्यालय के शिशुओं द्वारा रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया गया

रक्षाबंधन के त्यौहार के पावन अवसर पर महर्षि सान्दिपनी विद्या मंदिर पूर्व मा. वि. पालीडीह के बच्चों द्वारा रक्षाबंधन का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया गया जिसमें हर छोटी छोटी बच्ची बच्चों को राखी बांधते हुए नजर आई एवं मिठाई खिला कर रक्षा एवं समाज कल्याण का वादा मांगा गया तथा वहां के डायरेक्टर टांकेश्वर खुटिया जी के द्वारा समस्त ग्राम वासियों को रक्षाबंधन के त्यौहार की एवं बच्चों को खासकर ढेर सारी शुभकामनाएं दी गई |

प्रमुख कहानियाँ
1. माता लक्ष्मी और राजा बलि की कहानी
कथानक: राजा बलि एक शक्तिशाली दानव राजा थे, जिन्होंने भगवान विष्णु को अपना द्वारपाल बनने का वचन दिया था। माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु को ढूंढते हुए बलि के राज्य आईं और उनके आश्रय में रहीं। लक्ष्मी ने खुद को बलि की बहन बताते हुए उन्हें राखी बांधी और विष्णु को वापस ले जाने का वचन मांगा। राजा बलि ने उन्हें वचन दिया और विष्णु को मुक्त कर दिया।
महत्व: यह कहानी दानशीलता और वचनों के पालन को सिखाती है, जहाँ लक्ष्मी ने रक्षा के बदले में अपना भाई का रूप धारण किया।
2. द्रौपदी और भगवान कृष्ण की कहानी
कथानक: जब भगवान कृष्ण शिशुपाल के वध के दौरान अपनी उंगली से घायल हो गए और रक्त बहने लगा, तो द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया।
महत्व: कृष्ण ने द्रौपदी से वचन दिया कि वे हमेशा उनकी रक्षा करेंगे। यह घटना भाई-बहन के अटूट बंधन और वफादारी का प्रतीक है।
3. रानी कर्णावती और हुमायूं की कहानी
कथानक: जब बहादुर शाह ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया, तो रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूं को रक्षा के लिए राखी भेजी।
महत्व: हुमायूं ने राखी का वचन निभाया और अपनी सेना लेकर चित्तौड़ की ओर प्रस्थान किया। हालांकि वे समय पर नहीं पहुंच सके, लेकिन उन्होंने बाद में चित्तौड़ पर हुए बहादुर शाह के हमले का बदला लिया।
4. इंद्र और इंद्राणी की कहानी
कथानक: देवताओं और असुरों के बीच युद्ध के दौरान, जब देवता पराजित होने लगे, तो इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर एक पवित्र रक्षासूत्र बांधा।
महत्व: इस रक्षासूत्र से इंद्र को शक्ति मिली और उन्होंने असुरों को पराजित किया।
ये कहानियाँ रक्षाबंधन के पर्व के मूल भाव को उजागर करती हैं, जो भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के साथ-साथ विश्वास और वफादारी के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

