पेंशन योजनाओं में सर्वे सूची की बाध्यता खत्म करने की उठी मांग, जनपद सदस्य चांदनी भोज देवांगन ने लिखा सरकार को पत्र

गुरुर। गुरुर क्षेत्र क्रमांक 2 के जनपद सदस्य चांदनी भोज देवांगन ने शासन प्रशासन को पत्र लिखकर पेंशन की विभिन्न योजनाओं में सर्वे सूची की बाध्यता को खत्म करने की मांग की है। उनका कहना है कि कई ऐसे लोग जो जरूरतमंद होते हैं लेकिन सर्वे सूची में नाम ना होने के चलते उन्हें पेंशन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। जो की विडंबना ही कही जा सकती है। ऐसे में सर्वे सूची को ही सिर्फ आधार ना बनाया जाए बल्कि जो वास्तविक समस्या है उनका आकलन कर संबंधित लोगों को पेंशन दिया जाना चाहिए। उन्होंने पत्र के माध्यम से अब तक संचालित योजनाओं में पेंशन को लेकर मापदंडों में जो खामियां हैं उन्हें भी बतलाया है। तो साथ ही उसमें क्या सुधार किया जा सकता है इस पर भी अपनी राय दी है। जनपद सदस्य चांदनी भोज देवांगन का कहना है कि
पेंशन योजना के अंतर्गत यदि कोई बालक दिव्यांग है तो उसके अंतर्गत उसे पेंशन मिलना चाहिए लेकिन 2002 की सर्वे सूची या 2011 की सर्वे सूची के कारण से उन्हें लाभ नहीं मिल पाता और जो मेरे हिसाब से गलत है। जो बच्चा विकलांग है तो उसका सर्टिफिकेट बड़े- बड़े 3 एमबीबीएस डॉक्टर द्वारा चेक करके दिया जाता है। तो उसके आधार पर पेंशन मिलना चाहिए। ना कि 2002 की या 2011 की सर्वे सूची देखकर। उसी तरह जो महिला विधवा हो गई हो तो उसके आधार पर उसके पति का डेथ सर्टिफिकेट देखकर उसकी पेंशन बनना चाहिए। साथ ही जो वृद्धा हो गई हो जिसकी उम्र 60 साल से ऊपर हो गया है वो भी नियम से पेंशन पा सकता है। उसका आधार कार्ड देखकर उसे भी पेंशन देने की नियम बनाई जाए और 2002 और 2011 की सूची को हटवा कर सर्टिफिकेट देख कर ही उससे पेंशन योजना का लाभ मिलना चाहिए।
