राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पत्थलगांव द्वारा किया गया “शहीदी सप्ताह” पर व्याख्यान का आयोजन… मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए गुरु सिंह सिख साब पत्थलगांव के अध्यक्ष एवं सदस्य

जब बात शहीदी की आती है तो भारतवासियों के नेत्र पटल पर कई सारी छवियां प्रस्तुत हो जाती है। किंतु जब बात बाल शहीदों की आती है तो सर्वप्रथम चार साहिबज़ादों का बलिदान नेत्रों के सामने प्रस्तुत हो जाता है । दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह में सिख समुदाय के दशम गुरु का पूरा परिवार शहीद हो गया एवं साथ ही उनके कुछ महान अनुयाई भी शहीद हो गए । इस त्याग एवं बलिदान को जीवित रखने के लिए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 दिसंबर को “वीर बाल दिवस” के रूप में घोषित किया । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पत्थलगांव ने प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी वीर बाल दिवस के उपलक्ष्य में शहीदी सप्ताह पर व्याख्यान का आयोजन किया । जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ प्रांत के प्रांत करवा चंद्रशेखर देवांगन जी , मुख्य अतिथि के रूप में गुरु सिंह सिख सभा के अध्यक्ष श्री हरजीत सिंह भाटिया जी , अध्यक्ष के रूप में श्री इंद्रजीत सिंह भाटिया जी एवं माननीय जिला संघचालक मुरारीलाल अग्रवाल जी उपस्थित थे । कार्यक्रम में विशेष रूप से गुरुद्वारा साहिब पत्थलगांव के दोनों ज्ञानी जी एवं गुरु सिंह सिख सभा के सदस्य भी उपस्थित रहे ।
मुख्य वक्ता चंद्रशेखर देवांगन जी ने शहीदी सप्ताह पर व्याख्यान देते हुए कहा ; “प्रारंभ से ही सिख समुदाय का इतिहास त्याग और बलिदान से परिपूर्ण रहा है। सिख समुदाय के 10 गुरुओं ने धर्म के प्रति अडिगता एवं समय की आवश्यकता के साथ त्याग एवं बलिदान की शिक्षा पूरे विश्व को सिखलाई है । जब पंडितों पर धर्म परिवर्तन करने की बात आई तो उन्होंने सिख समुदाय के नवे गुरु तेग बहादुर जी की शरण ली एवं गुरु तेग बहादुर जी ने हिंदुओं की रक्षा के लिए बहुत बड़ा बलिदान दिया एवं शहीद हो गए । त्याग एवं बलिदान का किस्सा यहीं खत्म नहीं हुआ , जब सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी का पूरा परिवार बिछड़ गया एवं दो साहिबजादे युद्ध करते हुए शहीद हो गए । चार दिनों तक छोटे साहिबजादो को भूखा रखा गया ताकि वह धर्म परिवर्तन कर ले एवं इस्लाम धर्म कुबूल कर ले , किंतु उन साहिबजादो को धर्मांतरित करना कहां इतना आसान था ?? अब बारी आई साहिबजादों को वजीर खान के दरबार में पेश करने की । तो वजीर खान ने एक ऐसा सुरंग बनाया जहां से लोगों को झुक कर आना पड़ता था और उन्होंने ऐसी ही अपेक्षा छोटे साहिबज़ादो से की कि वह झुक कर वजीर खान के दरबार में आए , किंतु गुरु गोविंद सिंह जी का खून उन छोटे साहिबज़ादो में दौड़ रहा था । उन्होंने पहले अपना पैर बाहर निकाला एवं सीना तानकर वजीर खान के दरबार में जा खड़े हुए । जहां उन्हें न जाने कितनी यातनाओ के साथ दीवार में चुनवा दिया गया , किंतु वह डरे नहीं बल्कि धर्म की अडिगता का उदाहरण दे गए । हम शत-शत नमन करते हैं उन वीर कर साहिबजादों को जिन्होंने अपने प्राण त्याग दिए किंतु धर्म ना बदला ।”
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए गुरुद्वारा साहिब पत्थलगांव के ज्ञानी जी ने कहा ; “पत्थलगांव का समग्र सिख समाज , राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का आभार व्यक्त करता है कि उन्होंने शहीदी सप्ताह के ऊपर इतना सुंदर व्याख्यान रखा एवं शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की । शहीदी सप्ताह के इस तारतम्य में हम मोतीराम मेहरा जी को भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने अपने पूरे परिवार का बलिदान देकर उन दो छोटे साहिबजादो को दो गिलास दूध पिलाया , जिसकी सजा में मोतीराम मेहरा के परिवार को गन्ने के रस निकालने वाली मशीन से शहीद कर दिया गया एवं साथ ही महान व्यापारी टोडरमल जी जिन्होंने साहिबज़ादो की अंतिम संस्कार हेतु न जाने कितनी सोने की सिक्कों से जमीन को खरीदी , जिसे आज विश्व में सबसे महंगी जमीन के नाम से जाना जाता है ।”
कार्यक्रम की अंतिम कड़ी में समस्त स्वयंसेवक एवं सिख समाज आपस में चाय पर चर्चा करते हुए कांकेर में हुई ईसाई हिंदू विवाद के ऊपर चर्चा किए एवं धर्म निष्ठा का संकल्प लेकर अपने अपने घर की ओर प्रस्थान किए , नगर कार्यवाह पवन अग्रवाल ने सभी उपस्थित स्वयंसेवकों एवं विशिष्ट अतिथियों का आभार प्रकट किया ।




