इंजको/किल्केश्वर धामः
सावन का पवित्र महीना सिर पर है। शिव भक्तों ने बोल-बम और डाक-बम की गूंज के साथ कांवड़ यात्रा की तैयारियां शुरू कर दी हैं। लेकिन, आस्था के इस सफर पर इस बार प्रशासन की लापरवाही का ‘गड्डा’ भारी पड़ता दिख रहा है। इंजको से प्रसिद्ध किल्केश्वर मंदिर को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग इस वक्त विकास की नहीं, बल्कि विनाश की कहानी बयां कर रहा है। बारिश के मौसम ने इस अधबनी सड़क को एक ऐसे दलदल में तब्दील कर दिया है, जहां से गुजरना साक्षात् यमराज को न्योता देने जैसा है।
उप-संपादक वैभव शर्मा की जांबाज ग्राउंड रिपोर्ट:
जनता की इस भारी परेशानी को देखते हुए ‘आज की सुर्खियां’ न्यूज़ चैनल की टीम ने इस मार्ग की कड़वी हकीकत को खुद परखने का फैसला किया। हमारे उप-संपादक वैभव शर्मा खुद टीम के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर इस खस्ताहाल सड़क का सच जानने निकले। ग्राउंड जीरो पर जो मंजर दिखा, उसने टीम के भी रोंगटे खड़े कर दिए। आधी अधूरी बनी सड़क पर इतने बड़े और गहरे गड्ढे हैं कि दोपहिया वाहन ताश के पत्तों की तरह डगमगा रहे हैं। हल्की सी बारिश होते ही ये गड्ढे पानी से भर जाते हैं, जिससे राहगीरों को यह अंदाजा ही नहीं मिल पाता कि आगे सड़क है या कोई गहरा कुआं।
ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोशः
इस मार्ग से रोजाना गुजरने वाले स्थानीय ग्रामीणों, हाट-बाजार करने वाले व्यापारियों और दूध-सब्जी वालों के लिए यह सफर किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क को अधूरा छोड़कर ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारी चैन की बंसी बजा रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि जब सावन के मेले में हजारों की तादाद में श्रद्धालु नंगे पैर और दौड़ते हुए (डाक बम) इस मार्ग से गुजरेंगे, तो उनके पैरों में छाले पड़ेंगे या ये नुकीले पत्थर और गहरे गड्ढे उन्हें लहूलुहान करेंगे? ‘आज की सुर्खियां’ के मंच से वैभव शर्मा सीधे तौर पर प्रशासन से यह सवाल दागते हैं कि आखिर इस मार्ग की सुध कब ली जाएगी? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही अधिकारियों की नींद टूटेगी?
