प्रशासनिक रसूख या नियमों की सरेआम धज्जियां ? पूर्व तहसीलदार प्रांजल मिश्रा के ‘कारनामों’ का काला चिट्ठा, ट्रांसफर के बाद 33 विवादित रजिस्ट्रियों के आरोपों से हड़कंप !
पत्थलगांव (जशपुर)। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक महकमे से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्थलगांव के पूर्व तहसीलदार प्रांजल मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने पद से कार्यमुक्त (Relieve) होने के बाद भी, बिना किसी संवैधानिक अधिकार के, बैक-डेट में एक के बाद एक कुल 33 विवादित जमीनों की रजिस्ट्रियों को अंजाम दे डाला। करोड़ों रुपये के इस कथित भू-घोटाले की गूंज अब सीधे प्रदेश के मुखिया और महामहिम राज्यपाल के दरबार तक जा पहुंची है।
‘आज की सुर्खियां’ की विशेष खोजी रिपोर्ट: उप-संपादक वैभव शर्मा के साथ
शिकायती दस्तावेजों और सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, तहसीलदार प्रांजल मिश्रा को 9 अप्रैल को ही बगीचा तहसील के लिए कार्यमुक्त कर दिया गया था। नियम कहते हैं कि पद छोड़ने के बाद कोई भी अधिकारी शासकीय दस्तावेजों या सील-साइन का उपयोग नहीं कर सकता। लेकिन आरोपों के मुताबिक, नियमों को ठेंगे पर रखकर 9 से 13 अप्रैल के बीच ताबड़तोड़ तरीके से विवादित भूखंडों की रजिस्ट्री की गई, जो सीधे तौर पर पद के दुरुपयोग और भारी वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।

आदिवासी परिवार की कीमती जमीन पर ‘कथित डाका’
इस पूरे मामले का सबसे स्याह और संवेदनशील पहलू रायगढ़ रोड स्थित खसरा नंबर 333/1 की जमीन से जुड़ा है। यह बेशकीमती जमीन साल 1956 से एक गरीब आदिवासी परिवार के हक की थी। शासकीय नियमों के तहत आदिवासी भूमि की सामान्य बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध है। लेकिन गंभीर आरोप हैं कि इस भूमि की प्रकृति को अवैध रूप से सामान्य श्रेणी में बदला गया और फिर रसूखदारों को फायदा पहुंचाने के लिए इसके कई टुकड़े कर बेच दिया गया। बताया जा रहा है कि इसी जमीन से जुड़े पुराने हेरफेर के कारण पूर्व पटवारी मैडम भगत को पहले ही सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है, जिससे यह साफ होता है कि इस जमीन पर खेल बहुत पुराना और गहरा है।
कानूनी शिकंजे में घिरे साहब, जांच शुरू साक्ष्यों और दस्तावेजों के साथ इस पूरे ‘रजिस्ट्री कांड’ की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री और राज्यपाल से की गई है, जिसके बाद उच्च स्तर पर प्रशासनिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं। ‘आज की सुर्खियां’ इस पूरे मामले में निष्पक्षता के साथ जांच रिपोर्ट और जिम्मेदार अधिकारियों के आधिकारिक बयान का इंतजार कर रहा है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। लेकिन वर्तमान में सामने आए दस्तावेज पूर्व तहसीलदार को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

