*पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने विधानसभा में उठाया भ्रष्टाचार व अनियमित्ता का मुद्दा*
*कहा- कांग्रेस के शासनकाल में हो रहे भ्रष्टाचार को भाजपा ने सिद्ध करके दिखाया है।*
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने विधानसभा परिसर पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि वन विभाग के प्रश्न में मंत्री जी ने अनियमित्ता को स्वीकार किया है और स्वीकार करने के बाद में दोषियों को सस्पेंड भी किया है, परन्तु इसका मुख्यरुप से जवाबदार अधिकारी डी.एफ.ओ है और इस पर कार्यवाही होनी चाहिए, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा भाजपा ने जिस भी विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है और जितने भी भ्रष्टाचार के मामलें सामने आ रहे हैं यह बात विधानसभा परिसर में साबित हो रही है। कौशिक ने कहा कि कांग्रेस सरकार के शासन काल में लगातार भ्रष्टाचार हो रहा है, लगातार अनियमित्ता हो रही है। चाहे वह डी.एम.एफ का मामला हो, कैम्प का मामला हो या अन्य मद में जो भी कार्य कराए जा रहे है उसमें यह साबित हो रहा कि छत्तीसगढ़ में भ्रष्टचार कि नदिया बह रही है।
उन्होंने कहा कि यह बात केवल भाजपा ही नहीं अब तो सत्ता पक्ष के विधायकों द्वारा भी हो रहे भ्रष्टाचार को स्वीकार कर रहे हैं, सरकार को घेरने कि कोशिश कर रहे हैं और सरकार इसे स्वीकार भी कर रही है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कौशिक ने कहा कि भाजपा ने इस बात को सिद्ध किया है कि कांग्रेस के शासनकाल में छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार की लहर बह रही है।

*स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा करने से कांग्रेस घबाराई हुई है : कौशिक*
*पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने स्थगन प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस पर लगाया आरोप*
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि विधानसभा में भाजपा ने महत्वपूर्ण स्थगन प्रस्ताव तेंदुपत्ता तोड़ाई को लेकर के लगाया। जिसमें 2017 में भाजपा की सरकार के समय 17.10 लाख मानक बोरे तेंदुपत्ता का संग्रहण होता था, जिनकी नीलामी के बाद कुल 1358 करोड़ रुपये वन समितियों को प्राप्त होते थे। इस प्रकार 2017 मे कुल 1176 करोड़ रु का भुगतान हुआ। वही कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2021 में कुल 13 लाख मानक बोरे का संग्रहण कर परिश्रमिक के रूप में 520 करोड़ एवं प्रोत्साहन राशि के रूप में सिर्फ 110 करोड़ रु का भुगतान किया इस प्रकार कुल 630 करोड़ का भुगतान हुआ। अर्थात वनवासियों के संग्रहण की मिलने वाली कुल राशि में काफी अंतर है। भाजपा के शासनकाल में तेंदुपत्ता में संग्रहणो को ढाई हजार में भी बोनस दिया जाता था, परिश्रमिक मिलता था। किन्तु कांग्रेस के शासन काल में तेंदुपत्ता की कीमत 4 हजार रु बढ़ाने के बाद भी संग्राहकों को पारिश्रमिक राशि कम मिल रही है। इसी के चलते भारतीय जनता पार्टी ने स्थगन प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इस कांग्रेस सरकार में इतनी भी हिम्मत नहीं है कि एक भी स्थगन को लेकर के चर्चा कराया जाए। यह सरकार चर्चा कराने से डर रही है, यह सरकार चर्चा कराने से भाग रही है और चर्चा के भागने का मुख्य कारण कि भाजपा जो आरोप लगाती है वह आरोप साबित हो रही है और इसी कारण यह सरकार चाहती है कि इसे अग्राह्य किया जाये। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कौशिक ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है कांग्रेस घबरा रही है और चर्चा से भाग रही है।
