महिलाओं के सशक्तिकरण में योग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है –डॉ शीला शर्मा

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘योग फॉर वीमन एंपावरमेंट’ यानी ‘नारी सशक्तीकरण के लिए योग’ रखी गयी है. योग फिट और एक्टिव ही नहीं रखता, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है. इसका सकारात्मक प्रभाव आत्मविश्वास और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है.अच्छा स्वास्थ्य ही सशक्तीकरण और सफलता का आधार होता है. इसी को ध्यान में रखते हुए यह थीम चुनी गयी है.योग शरीर को आकर्षक ही नहीं बनाता, अपितु हर स्तर पर काम करता है. योग मस्तिष्क, शरीर और आत्मा के मध्य तारतम्य को बेहतर बनाता है, जो स्वास्थ्य, सफलता और सशक्तीकरण का आधार है.योग केवल आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ही बेहतर नहीं बनाता, बल्कि आपको स्वयं से कनेक्ट करता है. नियमित रूप से योगाभ्यास करना महिलाओं को खुद को और अपनी आंतरिक क्षमताओं को पहचानने में सहायता करता है. योग आत्मविश्वास पैदा करता है आत्मविश्वासी महिलाएं अपनी क्षमता, योग्यता और शक्तियों के प्रति अधिक जागरूक होती हैं. यही जागरूकता उनकी अपने जीवन पर पकड़ को मजबूत बनाती है और खुद के लिए निर्णय लेने का हौसला देती है.जो महिलाएं नियमित रूप से योग करती हैं, वे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से अधिक मजबूत होती हैं. यही मजबूती नारी सशक्तीकरण का आधार बनती है.योग तनाव को कम कर मस्तिष्क को शांत और शरीर को रिलैक्स करता है. जब एकबार आप आंतरिक शांति पा लेते हैं, तो जीवन की चुनौतियों का मुकाबला करना और खुश रहना आसान हो जाता है.

जो महिलाएं जीवन के उतार-चढ़ाव का प्रबंधन ठीक तरह से करना सीख जाती हैं उनकी दूसरों पर निर्भरता कम हो जाती है.योग शारीरिक शक्ति बढ़ाता है और संतुलन व लचीलेपन में सुधार करता है. इससे आपको अपने शरीर की क्षमताओं और सीमाओं को पहचानने में भी सहायता मिलती है.जब आपका तन-मन सामंजस्य में काम करता है, तो जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है. योग का सबसे बड़ा फायदा तन-मन के संबंध को बेहतर बनाता है. नियमित रूप से योगाभ्यास करना आपको यह समझने में सहायता करता है कि आपके विचारों और भावनाओं का आपके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है. नियमित रूप से योग का अभ्यास करने से शरीर के विभिन्न अंग व तंत्र बेहतर तरीके से काम करते हैं. इससे स्वस्थ रहने और बीमारियों से बचने में सहायता मिलती है.
