लिटिल रोज किंडर गार्डन विद्यालय में रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया गया

आप सभी को पता है कि रक्षाबंधन का त्योहार हमारे भारत देश के लिए कितना महत्वपूर्ण त्यौहार है इस दिन बहन अपने भाई के कलाई पर राखी बांधकर अपनी रक्षा का वचन मांगती है अपने भाई से एवं ईश्वर से अपने भाई की सलामती के नाम का रक्षा कवच अपने भाई के हाथों में बनती है इसी बीच हमारे जाने-माने लोकप्रिय विद्यालय लिटिल रोज स्कूल जो कि अब आपके अपने बच्चों का किंडर गार्डन स्कूल भी मौजूद है वहां पर छोटे-छोटे नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया गया तथा शिक्षा के साथ-साथ संस्कार का भी अध्ययन होता है करके एक बार और आपका अपना एकमात्र पसंद का विद्यालय लिटिल रोज साबित कर चुका है जिसमें बच्चों को शिक्षा एवं शारीरिक शिक्षक के साथ साथ सभी त्योहारों का भी ज्ञान दिया जा रहा है की किस त्यौहार पर किस तरह से महोत्सव को मनायाजाए जिससे बच्चों को भविष्य में समाज में उठने बैठने की एवं मिलजुलकर रहने की सीख मिलती है लिटिल रोज के डायरेक्टर श्री पवन अग्रवाल जी के द्वारा रक्षाबंधन त्यौहार की ढेर सारी शुभकामनाएं पूरे नगर वासियों को दी गई तथा बच्चों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं भी दी गई
रक्षाबंधन की कई प्रमुख कहानियाँ प्रचलित हैं, जिनमें से दो सबसे मशहूर हैं: पहली, देवों और दानवों के बीच के युद्ध के दौरान देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बाँधकर अपना भाई बनाया था, जिससे विष्णु जी के पाताल लोक से वापस आने का मार्ग प्रशस्त हुआ। दूसरी कहानी महाभारत की है, जब भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लगी थी, तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर पट्टी बाँधी थी, जिस पर कृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया था।
राजा बलि और देवी लक्ष्मी की कहानी
पृष्ठभूमि:
राजा बलि एक बहुत ही शक्तिशाली दानव राजा थे और भगवान विष्णु ने उनकी परीक्षा लेने के लिए वामन का रूप धारण कर उनसे तीन पग भूमि दान में मांगी।
घटना:
बलि ने भूमि दान कर दी, और वामन ने एक पग में स्वर्ग और दूसरे में धरती को नाप लिया। तीसरे पग के लिए कोई जगह नहीं बची, तो बलि ने वामन से अपना सिर बढ़ाने को कहा।
राखी का महत्व:
वामन ने बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया, और बलि के अनुरोध पर भगवान विष्णु को द्वारपाल बनने का वचन भी दे दिया।
लक्ष्मी जी की भूमिका:
भगवान विष्णु के पाताल लोक में चले जाने से चिंतित लक्ष्मी जी ने एक दासी का रूप धारण किया और बलि के राज्य में शरण मांगी। उन्होंने बलि को राखी बांधी और अपना भाई बनाया।
भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कहानी
घटना:
जब भगवान कृष्ण की उंगली में किसी सुदर्शन चक्र से चोट लगी, तो खून बहने लगा।
द्रौपदी का कार्य:
द्रोपदी ने तत्काल अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़ा और उसे कृष्ण की उंगली पर पट्टी के रूप में बाँध दिया, जिससे खून बहना रुक गया।
कृष्ण का वचन:
द्रौपदी की दयालुता से प्रभावित होकर, कृष्ण ने उन्हें हमेशा सुरक्षित रखने का वचन दिया। यह वचन उन्होंने महाभारत के दौरान कौरवों के सामने द्रौपदी के अपमान के समय भी निभाया था।
