सरायपाली कामर्स व कैट संघ के पदाधिकारियो ने अनब्रांडेड प्रीपेड खाद्यानों को जीएसटी से मुक्त रखने ज्ञापन सौंपा सरायपाली:— छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एवं कैट नगर इकाई और जिला इकाई द्वारा सरायपाली बसना के विधायक के साथ सांसद महासमुंद को ज्ञापन सौंपकर अनब्रांडेड प्रीपैक्ड खाद्यान्नों पर लगे 5% जीएसटी से मुक्त रखने के लिए मांग उठाई है।
छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के महासमुंद जिला के मंत्री संजय अग्रवाल, कैट नगर इकाई सरायपाली के अध्यक्ष मदन लाल अग्रवाल , चेंबर ऑफ कॉमर्स सरायपाली नगर इकाई के अध्यक्ष अवधेश अग्रवाल ,किराना व्यापारी संघ के अध्यक्ष नीरज अग्रवाल एवं अनूप अग्रवाल द्वारा सरायपाली विधायक किस्मत लाल नंद व बसना विधायक देवेंद्र बहादुर सिंह से मिलकर इस संबंध में ज्ञापन सौंपते हुवे मांग की गई कि सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार पर इन समस्याओं पर ध्यान रखते हुए इन कानूनों को लागू करने से रोकने की पहल की जाए । कैट की राष्ट्रीय टीम व छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स की टीम की पहल पर सभी विधायकों, सांसदों को ज्ञापन सौंपा जा रहा है। व्यापारियों की मांग है कि जीएसटी कॉउंसिल द्वारा हाल ही में हुई अपनी मीटिंग में पैक किए अथवा लेबल लगाए गए सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों एवं कुछ अन्य वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लाने की सिफारिश पर देश के खाद्यान्न व्यापारियों में बेहद निराशा है । क्योंकि इससे आम सामान की कीमत पर बड़े ब्रांड का कारोबार बढ़ेगा। अब तक ब्रांडेड नहीं होने पर विशेष खाद्य पदार्थों, अनाज आदि को जीएसटी से छूट दी गई थी। कॉउन्सिल के इस निर्णय से प्री- पैक, प्री- लेबल दही, लस्सी और बटर मिल्क सहित प्री- पैकेज्ड और प्री-लेबल रिटेल पैक पर भी अब जीएसटी कर लगेगा और देश भर में 6500 से अधिक अनाज मंडियों में खाद्यान्न व्यापारियों के व्यापार में बड़ा अवरोध आएगा।निश्चित रूप से जीएसटी कर संग्रह में वृद्धि होनी चाहिए किन्तु आम लोगों की वस्तुओं को कर स्लैब में लाने के बजाय कर का दायरा बड़ा करना चाहिए जिसके लिए जो लोग अभी तक कर दायरे में नहीं आये हैं, उनको कर दायरे में लाया जाए जिससे केंद्र एवं राज्य सरकारों का राजस्व बढ़ेगा। इस संबंध में हम सरकार के साथ सहयोग करने के लिए सदैव तत्पर हैं । आजादी से अब तक खाद्यान्न पर कभी भी कर नहीं था किन्तु पहली बार बड़े ब्रांड वाले खाद्यान्न को कर दायरे में लाया गया। सरकार की मंशा आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को कर से बाहर रख उनके दाम सदैव कम रखने की रही है। इसलिए ही वर्ष 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इन जरूरी वस्तुओं को कर से बाहर रखा और इस बात को ध्यान में रखते हुए हमारा आपसे आग्रह है कि प्री पैक्ड एवं प्री- लेबल वस्तुओं पर पूर्व की भाँति जीएसटी को कर रहित किया जाए ।
इस संदर्भ में हमारा निवेदन है कि देश में सभी बड़े ब्रांड की कंपनियां देश की आबादी के केवल 15 प्रतिशत जिसमें उच्चतम वर्ग, उच्च वर्ग एवं उच्च मध्य वर्ग के लोगों की ही जरूरतों की पूर्ती करते हैं जबकि बड़े स्तर पर देश के सभी राज्यों में छोटे निर्माता जिनका अपना लोकल लेबल ही होता है देश की 85 प्रतिशत आबादी की मांग को पूरा करते हैं ऐसे में इन वस्तुओं के जीएसटी में कर दायरे में आने से जहां छोटे निर्माताओं एवं व्यापारियों पर कर पालन का बोझ बढ़ेगा वहीं आम लोगों को मिलने वाली बुनियादी वस्तुएं भी महंगी हो जाएंगी।इस आशय का ज्ञापन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को राष्ट्रीय टीम द्वारा सौंपा गया ।



