स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार फाइलेरिया – मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन पीसीआई इंडियन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा -एक सामान्य जानकारी फाइलेरिया एक वेक्टर जनित बीमारी है जो संक्रमित मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। क्यूलेक्स मच्छर जमे हुए गंदे पानी में पैदा होते हैं।

हाथीपांव एवं हाइड्रोसिल इसके प्रमुख लक्षण हैं। इस बीमारी की गति काफी धीमी होती है जिसके कारण लोग इसके प्रति लापरवाह रहते हैं। फाइलेरिया बीमारी किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकता है ,मच्छर सभी को काटती है ।
संक्रमण होने के 6-7 वर्षों के बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं हाथीपांव का अंतिम चरण काफी भयंकर होता है जो व्यक्ति को अपंग बना देता है एवं इसका कोई ईलाज भी नहीं है।
MDA/IDA क्या है। सामूहिक दवा सेवन के अंतर्गत DOTपद्धति यानि कि ट्रिपल ड्रग।
इस अभियान में तीन तरह की फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई जाएगी वो भी साल में बस एक बार हाथीपांव होगा साफ़, दवा सेवन के उपरांत आपको अपने शरीर में कुछ लक्षण दिखाई देंगे . सरदर्द ,बुखार ,उल्टी तो घबराए नहीं ये लक्षण शुभ संकेत है। कि अपने दवा सेवन किया और आपके शरीर में माइक्रोफाइलेरिया पाए गए हैं जिनपर दवा का असर हुआ है IVERMACTIN,DEC एवं ALBENDAZOLE दवा पूरी तरह से सुरक्षित है।

