जाति प्रमाण पत्र नियमों की अवहेलना पर भीम मानव कल्याण संगठन सख्त,

माननीय राज्यपाल से मिलकर न्याय की गुहार लगाई
डोंगरगढ़ मे छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के नागरिकों को जाति प्रमाण पत्र बनवाने में आ रही गंभीर व्यावहारिक दिक्कतों को लेकर भीम मानव कल्याण संगठन ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन के अध्यक्ष चंद्रशेखर बोरकर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ के माननीय राज्यपाल श्री रमेन डेका से राजभवन में सौजन्य मुलाकात की और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
2013 के अधिनियम की हो रही खुलेआम अवहेलना
संगठन के अध्यक्ष चंद्रशेखर बोरकर ने राज्यपाल को बताया कि छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति का प्रमाणिकरण विनियमन) अधिनियम, 2013 के तहत राज्य में जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को बेहद सरल और सुलभ किया गया था। जिसमें 2013 के अधिनियम के तहत राज्य में 1950 और 1984 के दस्तावेजों की अनिवार्यता को खत्म कर ग्राम सभा व नगरीय निकायों के प्रस्ताव के आधार पर जाति प्रमाण पत्र जारी करने का स्पष्ट प्रावधान है।
इस ऐतिहासिक अधिनियम के मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं: 1. SC/ST वर्ग के लिए: जाति प्रमाण पत्र के लिए 1950 के दस्तावेजों की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त किया गया।
2. OBC वर्ग के लिए: प्रमाण पत्र के लिए 1984 के पुराने दस्तावेजों की अनिवार्यता को खत्म किया गया!
3. यदि किसी के पास पुराने दस्तावेज नहीं हैं, तो ग्राम सभा और नगरीय निकायों के प्रस्ताव (पंचनामा/सत्यापन) के आधार पर ही जाति प्रमाण पत्र जारी करने का स्पष्ट कानूनी प्रावधान किया गया।
इसके बावजूद, वर्तमान में फील्ड पर तैनात प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शासन के इन नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है, जिससे समाज के जरूरतमंद लोग और युवा परेशान हो रहे हैं।
लगातार शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस सामाजिक अन्याय को रोकने के लिए वे लंबे समय से जमीनी स्तर पर प्रयासरत हैं। इस संबंध में स्थानीय अनुविभागीय अधिकारी (SDM), जिला कलेक्टरों सहित छत्तीसगढ़ शासन के अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री खुशवंत साहेब को भी लिखित में पत्र सौंपकर नियमों का पालन कराने का आग्रह किया जा चुका है। अधिकारियों के उदासीन रवैये के कारण ही अब संगठन को सीधे महामहिम राज्यपाल की शरण में आना पड़ा है।
राज्यपाल ने दिया त्वरित निराकरण का भरोसा
माननीय राज्यपाल श्री रमेन डेका ने संगठन की सभी बातों और कानूनी पहलुओं को बेहद ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे जल्द ही संबंधित उच्च अधिकारियों को इस विषय पर निर्देशित करेंगे, ताकि शासन के नियमों के अनुरूप आरक्षित वर्ग के लोगों को बिना किसी प्रताड़ना के जाति प्रमाण पत्र जारी किए जा सकें।
मुलाकात में ये रहे उपस्थित
राजभवन में हुई इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान भीम मानव कल्याण संगठन के प्रमुख पदाधिकारी विनायक मेश्राम, निधि गजभिये, आकाश खोटे सहित संगठन के कई अन्य वरिष्ठ सदस्य और कार्यकर्ता मुख्य रूप से मौजूद रहे।



